Friday, August 14, 2009

गुलमोहर

गुलमोहर के पेड़ों के निचे खड़ी
याद आई पीछली बातें
गर्मियों की तपती धुप में
तृष्णा लायी पीछली यादें
शज़र के पत्ते में छुपी
तनहैई की यादें
बारहा याद करती उनको
दीद करने को चाहता है दील फीर
दीद तो आखीर मील ही गया
प्यार नया फीर खील ही गया
झीलों के दरमयान दील का एक टुकडा गीरा
यादों का फीर नया गुलशन खीला
खीला था मन कहीं किसी का
गुल खिले थे गुलज़ार में
टुकडा लिए हम हाथों में
खोये रहे किसी के याद में ........................

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