Saturday, August 15, 2009

फल्सफां

बाद मुद्दत के पता चल फल्सफां उन्हें
अफसाना बयां कर रहे थे
बात तो हो रही थी मगर लफ्ज नही थे
चाँद बातों मैं ही हम खो गए सपने मैं
सपने तो थे मगर आंखों मैं नींद नही थी
ऐ मेरे दील प्यार तो हुआ है तुझे भी
वरना दरख्तों से मेरा हाल न पुछा करते
यूँ ही न कहा करते दर्द भरा दील तो मेरा भी है
और अफसाना बयां करने को हमसे न पुछा करते
आहीस्ता आहीसता जले तो हो तुम भी
रातों मैं आँख खुली कर सोये तो हो तुम भी
वरना रातों मैं हिचकियाँ हमें आया न करते ...........................

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