Wednesday, August 19, 2009

सवाल

जब तुम्हारी याद तड़प बन गए
हमने उसे एक नाम दे दिया
ऐसे ही तमाम पलों की यादें
समेटी तो ख्याल
लफ्जों मैं उतर आए
ये खामोश इबादत है..................
चुप चुप से पलों मैं
सांसों में
समेट लेना ,
हम जी जायेंगे
बरसों की दूरी
और नदी की रेत पर
तुम्हारा नाम लिख कर
पूछेंगे ख़ुद से
"तुम इतने अच्छे क्यों हो ?".............

2 comments:

  1. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज ३० मई, २०१३, बृहस्पतिवार के ब्लॉग बुलेटिन - जीवन के कुछ सत्य अनुभव पर लिंक किया है | बहुत बहुत बधाई |

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  2. वाह ,बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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